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काशी में महिलाओं ने थामा ई-रिक्शा, आत्मनिर्भरता की लिखी नई इबारत

वाराणसी। ग्रामीण अंचलों में बदलाव की एक नई बयार बह रही है। मिर्जामुराद और आराजी लाइन ब्लॉक की महिलाएं अब न केवल घर की चौखट लांघ रही हैं, बल...

वाराणसी। ग्रामीण अंचलों में बदलाव की एक नई बयार बह रही है। मिर्जामुराद और आराजी लाइन ब्लॉक की महिलाएं अब न केवल घर की चौखट लांघ रही हैं, बल्कि ई-रिक्शा के स्टियरिंग थामकर अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की राह भी तैयार कर रही हैं। लोक समिति संस्था से जुड़ी इन महिलाओं ने ई-रिक्शा चलाकर न केवल आर्थिक तंगी को मात दी है, बल्कि समाज के सामने स्वावलंबन की एक नई मिसाल पेश की है।
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आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचा रहीं 'पौष्टिक निवाला'


लोक समिति संस्था से जुड़ी सीता, शारदा, अनीता और सुमन जैसी जांबाज महिलाएं अब प्रतिदिन क्षेत्र के 11 गांवों के 78 आंगनबाड़ी केंद्रों तक लगभग 2000 बच्चों के लिए ताजा नाश्ता और भोजन पहुंचा रही हैं। सामाजिक संस्था लोक समिति को 'जोमैटो फीडिंग इंडिया' की ओर से चार ई-रिक्शा उपहार स्वरूप मिले हैं, जो अब इन महिलाओं की आय और आत्मविश्वास का जरिया बन गए हैं।

बच्चों को अफसर बनाने का है संकल्प

पिलोरी गांव की शारदा और बेनीपुर की अनीता का कहना है कि शुरुआत में गाड़ी चलाने में डर लगता था, लेकिन अब वे निडर होकर गांव की पगडंडियों पर रिक्शा दौड़ाती हैं। शारदा भावुक होकर कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे अच्छी शिक्षा पाकर बड़े अफसर बनें, इसीलिए मैंने यह काम चुना है।" वहीं, लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने बताया कि इन महिलाओं को आशा ट्रस्ट के सहयोग से बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार महिलाएं इस भूमिका में नजर आ रही हैं।